प्यार में भीगते-भिगाते रहो

आज जितना भी बरसता है
बरस जाने दो,
फिर तो सावन भी चला जायेगा,
सींच कर कोना-कोना धरती का
फिर तो सावन भी चला जायेगा।
आज जितना भी चाहो भीगो तुम
प्यार ही प्यार भरा मौसम है,
प्यार में भीगते-भिगाते रहो,
फिर तो सावन भी चला जायेगा।

Comments

10 responses to “प्यार में भीगते-भिगाते रहो”

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद शास्त्री जी

  1. Satish Tiwari

    बहुत ही बढ़िया

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद

  2. Indu Pandey

    bahut khoob

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद

  3. Kumar Piyush

    बहुत खूब

    1. Satish Pandey

      nice

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