प्रज्ञा शुक्ला शायरी

बे इन्तेहा मोहब्बत करते हैं
ये हम बहुत गलत करते हैं
तू मेरे कदमों के लायक भी नहीं और हम
तुझे सर पर बिठा कर रखते हैं..!!!

एक प्यारा सा दिल है
जिसमें कई सपने हैं
आती है मुस्कान जब
उसके पास अपने हैं

मुड़ के देखा इसलिए…
……..इन आँखों को
तुम्हारे आने का इन्तज़ार है…..!!

जब बात हो अच्छे स्वास्थ्य की……..तो बादाम नहीं
अच्छे माहौल की आवश्कता होती है।।।

जवाब के इन्तज़ार में…..जीवन बीत गया….पर कोई जवाब नहीं…।।

प्यार की तलाश में तेरे दर तक आये..
पर तुझे किसी और के साथ देखा तो….
हताश होके लौट आये…..।।

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