प्रभु! मैं तुझको कैसे पाऊं।

कौन है यहां अपना मेरा,
तुझ पर ही है, अर्पित जीवन सारा।
कौन-सी मैं व्यथा सुनाऊं,
प्रभु! मैं तुझको कैसे पाऊं।
कब तक यूं आस लगाऊ।
कुछ तो बोलो, हे प्रभु!
कब तक मैं यह ज्योति जलाऊ,
बुझ रही आशा की लौ,
कैसे इसमें प्रकाश जगाऊं,
प्रभु मैं तुझको कैसे पाऊं।

Comments

17 responses to “प्रभु! मैं तुझको कैसे पाऊं।”

  1. Priyanka Kohli

    Wow

  2. Neetu Mishra

    😍👌

  3. Aditya Kumar

    ईश्वर तो सर्वव्यापी है। कबीर की पंक्ति याद आती है मुझे ” जहा वे ईश्वर को सब श्वासो की श्वास में बतलाते है।

    1. सुंदर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद

  4. akash choudhary

    Bhajan bhi likha kare

  5. Anonymous

    बहोत ही मोहक मधुर रचना । अति सुंदर भाव

  6. प्रतिमा

    धन्यवाद

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