गीत – प्रभु से वन्दन
हमें प्रेम बहुत हैं रघुवर तुमसे
अपने चरण में बुला लेना
थोड़ा सा दया हम पर करना
मुझको भव से पार लगा देना
मैं दीन दुःखी आभागा हूँ
किस्मत का मैं तो मारा हूँ
हैं तुमसे प्रभू विनती इतनी
जीवन को मेरे सँवार देना
हैं जग में घनघोर अंधेरा
प्रभु मुझको राह दिखा देना
जीवन में मैं सेवा भाव करु
बस इतना हो मेरा कर्म सदा
जीवो पर सदैव समर्पित रखना
कर्म सेवी मुझे बना देना
भूमण्डल का मुझको प्रभु
रक्षक बेजुबानो का बना देना
हो कर्म सदा मेरा इतना
मुझको धरा पर जगह देना
हमें प्रेम बहुत हैं रघुवर तुमसे
अपने चरण में शरण देना
महेश गुप्ता जौनपुरी
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