कुछ बातें तुम कहो,
कुछ हम तुम्हारी सुने।
आओ मिलकर एक दूसरे से ,
फिर से बातें करें।।
कहना तुम भी कुछ चाहते,
चुप हमें भी नहीं रहना।
फिर यह दूरियां कैसी हैं,
जिन्हें हम मिटाना नहीं चाहते ।।
दूरियां तो फिर भी मिटाई जा सकती है जनाब,
मगर गलतफहमियों का क्या करें ।
कुछ शिकवे तुम करो ,कुछ गिला हम करें ।
आओ मिलकर एक दूसरे से,
फिर से बातें करें ।।
फासले करते-करते,आ गए हम कितनी दूर ।
मंजिल हो गई अब हम से, हजारों मील दूर।
समय तो रुकता नहीं मगर,
क्यों ना सोच कर यही ,
आओ मिलकर एक दूसरे से,
फिर से बातें करें।।

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