फिर कोई नज्म गुनगुनाता हूँ…

#shayri 2liner
जब तेरी याद आती है
चला आता हूँ,
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फिर कोई नज्म गुनगुनाता हूँ….

Comments

4 responses to “फिर कोई नज्म गुनगुनाता हूँ…”

  1. Geeta kumari

    बहुत खूब

  2. बेहद खूबसूरत पंक्तियां

  3. आपकी लेखनी काबिले-तारीफ है

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