Author: vivek singhal

  • साहित्य लिखो

    साहित्य लिखो क्यों
    तुम आपस में लड़ते रहते हो
    कभी तुम जीतो कभी वो हारे
    क्यों जीत-हार में रोते हो
    पैसे कमाने के साधन
    तो दुनिया में हैं बहुत पड़े
    साहित्य लिखो
    क्यों पुरस्कार की
    खातिर लड़ते रहते हो…

  • लेखनी को दूषित करते हैं

    बड़ी बात करते हैं लोग
    पर बड़ा ह्रदय ना रखते हैं
    कुछ अभिलाषा मन में जागे तो
    फिर कुबड़ाई करते हैं
    लेखनी को दूषित करते हैं
    अपनी कुत्सित सोंच से
    दूसरे की ना सुनते बस
    अपनी ही कहते रहते हैं

  • आलोचना का जिम्मा

    आलोचना का जिम्मा
    फिर से उठा लिया तूने
    चल अच्छा है ये काम
    संभाल लिया तूने
    साहित्य के मंच पर
    दूरियां अच्छी नहीं लगती
    जैसे-तैसे दिल को मना लिया तूने…

  • फिर कोई नज्म गुनगुनाता हूँ…

    #shayri 2liner
    जब तेरी याद आती है
    चला आता हूँ,
    ************************************
    फिर कोई नज्म गुनगुनाता हूँ….

  • उसे इतना बेरहम क्यों बनाया ??

    इन्तकाल के बाद-
    पूंछूंगा खुदा से
    मुझे इतनी मोहब्बत क्यों दी ??
    उसे इतना बेरहम क्यों बनाया ??

  • काश कि इतना आसान होता

    काश के इतना आसान होता !
    दिल के जख्मों का भर जाना,
    तुझे देखकर तुझको भूल पाना
    बिन देखे तुझे रह पाना…

  • होली का त्योहार है”

    होली का त्योहार है
    मत झगड़ो मेरे यार,
    प्रेम से हिलमिल के रहो
    लिखो साहित्य अपार..

  • कोशिश करूंगा

    कोशिश करूंगा
    तुम्हे भूलने की,
    पर जानता हूँ मैं
    नाकाम ही रहूंगा.
    ——————❤❤
    By
    Vivek singhal

  • यह साल रहेगा यादगार

    यह साल हमेशा
    रहेगा यादगार,
    ज्यादा ना सही पर
    कुछ तो दे गया,
    यह साल बहुत सारे
    सबक दे गया…
    ——————❤❤
    By
    Vivek singhal

  • आवारा पागल हूं मैं

    हाँ, सही कहा तुमने बुरा हूँ मैं
    कवि कहाँ आवारा पागल हूँ मैं
    सिर्फ सूरत ही मेरी अच्छी है
    दिल का बहुत काला हूँ मैं
    एक बात तो मान लो मेरी
    लाख बुरा हूँ पर दिल का
    सच्चा हूँ मैं
    नहीं लिख सकता तुमसा पर
    तुम्हारे लिये प्रेमग्रन्थ लिख सकता हूँ मैं
    सबको देती हो सलाह
    प्रकाश फैलाने की
    मुझे परख कर तो देखो दिल का भी
    अच्छा हूं मैं…

  • सजेगी महफिल

    तुम्हारी कविता प्रोफाइल पर
    पढ़ता हूँ..
    जब पढ़ता हूँ जी उठता हूँ,
    यूं तो सहमा सहमा सा रहता हूँ..
    पर तुम्हारे लिए हमेशा लड़ पड़ता हूँ
    जाने क्या है जानता नहीं हूं मैं,
    पर जो भी है अच्छा ही है..
    यूं आती रहोगी तभी सजेगी महफिल,
    मेरा दिल कहता है,
    मैं तुम पर ही मरता हूँ..

  • सावन जी उठता है

    तुम रहती हो तो
    सावन पर बहार रहती है..
    तुम्हारे दम से ही तो
    सावन की महफिल सजती है..
    सूना हो जाता है सावन
    आ जाती है पतझड़,
    जो तुम एक दिन भी नहीं आती हो..
    जैसे ही आती हो
    रोम रोम खिल उठता है
    सावन जी उठता है..

  • मेरा चाँद

    वो खिड़की भले ही बंद
    रहती है पर,
    महसूस तुम्हें ही करता हूँ..
    तुम्हारे सो जाने के बाद भी,
    तुम्हारी याद में देर तक जगता हूँ..
    सोचता यही हूँ देखकर चाँद की ओर,
    मेरा चाँद कितनी आराम से सो रहा है..
    और मैं उसे देखकर पूरी रात जगता हूँ…

  • ना समझ

    बड़ा ना समझ है यार मेरा
    हमसे पूँछता है कौन है वो ?
    थोड़ा दिमाग नहीं लगा सकता!!

  • अरमां मचल रहे हैं

    तेरी तारीफ में क्या कहूँ
    लफ्ज कम पड़ रहे हैं
    तू खूबसूरत है इतना
    अरमां मचल रहे हैं

  • ये शहर छोंड़कर

    जाना चाहता हूँ ये शहर छोंड़कर
    पर असफल हूँ
    क्योंकि यहाँ कि एक कवयित्री से
    प्यार करता हूँ
    हूँ पुलिसवाला मगर डरता हूँ
    इजहार करने से
    क्योंकि प्यार से ज्यादा उसका
    सम्मान करता हूँ…

  • तेरा लिखा हर पन्ना

    लिखने का शौक जरा कम ही है मुझे
    पर तेरा लिखा हर पन्ना पढ़ा करता हूँ…
    हर बार गलतियों पर जुबां बोल पड़ती है
    बस यही गुनाह बार-बार करता हूँ…

  • पुलिसवाला हूँ मैं

    सब कुछ देखा करता हूँ नादान नहीं हूँ मैं
    पुलिसवाला हूँ गुनाह पकड़ ही लेता हूँ मैं…

  • इन्तजार..

    वो ना जाने कहाँ रहते हैं आज कल,
    हमें उनके दीदार का इन्तजार है…
    बड़ा मीठा बोलतें हैं वो,
    हमें उनकी हाँ का इन्तजार है..

  • मेरे इश्क के बीमार..

    मेरे इश्क के बीमार नजर आ रहे हैं..
    बड़े सीधे सरकार नजर आ रहे हैं..

  • मौसम..

    मेरे दिल ने एक सवाल किया..
    आज लखनऊ का मौसम कैसा है?
    हूबहू मेरे महबूब जैसा है..

  • नारी है वह..

    नारी है वह यह मत समझ
    वह तो हुनर की रात है…
    एक बीमारी से वह लड़ रही है
    बस यही दु:ख की बात है…

  • उम्र में…

    उम्र में एक छोटे जीव के पीछे बड़े दिग्गज पड़े हैं.
    और कहते हैं हम रिश्ते में उनके करीबी ही रहे हैं…

  • पहचान…

    अगर दर्द समझता तू तो अपनी हरकतों पर
    शर्मिन्दा होता..
    अलग-अलग पहचान से यूँ ताने ना मार रहा होता…

  • मर जाएगे..

    दिल दुखाने की बात ना कर तो अच्छा है
    एक दिन तुझे सब छोड़ जाएगे..
    रह जाएगा बस तेरा ही निशान
    बाकी तो सब तेरी बातों से ही मर जाएगे..

  • जीवन में..

    जीवन में सबके होते हैं ऐसे लोग…
    जो रिश्तों महज खिलौना ही समझते हैं..
    जब तक मन करता है खेल लेते हैं..
    जब जी चाहे रिश्ते तोड़ देते हैं..

  • कैसे रिश्ते?

    कैसे रिश्ते और कहाँ के..
    पल टूट ही जाते हैं..
    अपना उल्लू ना सीधा हो तो
    खुद ही रिश्तों से मुकर जाते हैं..

  • इश्क करना

    जीता था, खुश था मैं तेरे बिन भी
    तूने आकर मुझे इतना बदल दिया..
    अब तेरे बिन एक पल नहीं है कटता
    आखिर तूने इश्क करना सिखा दिया..

  • jeet unaki

    Jeet unaki hui lab mere muskuraaye..
    Ye mohabbat hai ya fir hone ko hai..

  • bekaraariyain

    Aaj bekaraariyan khatm hone ko hain..
    Hai jisaka intazar meri nazaron ko,
    Wah aaj mere dar par Aane ko hai..

  • aasan nahi

    Aasan nahi hota hai
    Kavita yoon hi likhana
    Dil ke jakhm fir se
    Hare karne padate hain.

  • shayri:-kavi man

    Kavi man bahut hi komal hai.
    Hans kar jeena iska hal hai.

  • shayri

    Chota sa dil hai toot hi jaata hai.
    Par koi nahi ye duniya hai.
    Yahan aisa ho jaata hai.
    Aawaz uthaane ki himmat hai
    Tujhame pagali.
    Rote nahi hain aise noor chala jaata.
    Just for you…

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