फिर लगाने आग आये

बात ठंडी हो चुकी थी
फिर लगाने आग आये
सोचते हैं जो कहें हम
सब करें स्वीकार उसको।
दूसरों पर फेंक कीचड़
मत बनो यूँ पाक-साफ़
खुद की गलती देख लो
पहले करो स्वीकार उसको।

Comments

4 responses to “फिर लगाने आग आये”

  1. Bahut Sundar aur Sach likha hai aapne

  2. Geeta kumari

    Nice

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