फिर से संभल jana

जारी रहता है जीवन में समस्याओ का आना जाना
मुकाबला करो इनका मत बनाओ बहाना
संघर्ष बिना जीवन में सौंदर्य नहीं आता
गिरना स्वभाव है मगर फिर से संभल जाना

Comments

4 responses to “फिर से संभल jana”

  1. यथार्थ चित्रण

  2. Amita

    संघर्ष है तभी जीवन है,
    सुंदर पंक्तियां

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