अनमोल बचपन की धरती पर,
खेलों का नगाड़ा बजता है।
हंसी की बारिश जगमगाती है,
चिंताओं से पूरी दुनिया बचती है।
बचपन की मजबूत डोर थाम,
सपनों से गहरी ये नदियां बहती हैं।
जहां खिलौनों की दुनिया बसती है,
और चिंताओं की हवा नहीं चलती है।
छोटी-छोटी चोटों के बीच,
खेल-खेल में बच्चों की सीख होती है।
प्यार से बंधे रिश्ते निभाते हैं,
संगीत के सुरों में उड़ जाते हैं।
घायल कटाक्षों और खुशियों के आंसू,
माता-पिता की ममता का दिया जलाते हैं।
जीवन के सफ़र में हमेशा साथ होते हैं,
बचपन की मस्ती की यादें बहती हैं।
इसलिए आओ याद करें वो अनमोल दिन,
बचपन की मिठास को मन में समेटें।
क्योंकि वो सपनों की दुनिया है,
जिसका स्पर्श हृदय को सुखद बनाती है।
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