इक्कीसवीं सदी के बच्चे हैं अपनी संस्कृति से अंजान,
रामचरितमानस हो या हो भगवत गीता,इनका तनिक भी नहीं ज्ञान,
पूछा कुछ बच्चों से…..
कौन था रावण और कौन थे श्री राम,
कौन थी अपनी सीता माता कौन थे हनुमान,
बच्चे जवाब न दे पाते इनकाे तनिक भी नहीं ज्ञान,
कौन थे सुदामा कौन थे कृष्ण भगवान,
कौन थी राधा रानी कौन थे वृषभान
बच्चे कुछ नहीं जानते इनकाे तनिक भी नहीं ज्ञान,
कौन है गिरोह बजरंगी भाईजान
बच्चों को कराएं अपनी संस्कृति का ज्ञान

Comments
7 responses to “बच्चों को कराएं अपनी संस्कृति का ज्ञान”
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गिरोह के स्थान पर हीरो शब्द है,
क्षमा चाहती हूं
कविता का संपूर्ण अंश प्रेषित नहीं हो पा रहा है।।-

प्रेषित हो या ना हो आप के भाव हमारे ह्रदय तक पहुंच गए
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सुंदर विचार
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वाह बहुत खूब
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बहुत-बहुत धन्यवाद
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विचारणीय तथ्य
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धन्यवाद प्रज्ञा जी
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