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  1. धोखे और नफ़रत के साथ किसी भी व्यक्ति का भला नहीं हो सकता है
    “दिखावा करके सखा का फिर तुम दगा करोगे, बताओ कैसे,
    बिठा के दिल में छुरा चला दो जमीर देगा सलाह कैसे।” …आह! ,वाह!,बहुत खूब ,जीवन में धोखा देने वाले लोगों से सावधान करती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही उच्च स्तरीय रचना, लाजवाब अभिव्यक्ति और शानदार प्रस्तुति

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