बदलता ज़माना

सूना था वक़्त रुकता नहीं, बहता है, बदलता है, बस राह अपनी;
जाने कब खो गए वो दिन प्यारे
जाने कब छूट गए वो लोग सारे,
बच गई तो बस कुछ एहसास न्यारी,
रूठ गई क्या हमसे ये ज़िंदगी प्यारी?

बदल गई क्या वो सूरज की रोशनी निराली,
बदल गई क्या वो चिड़ियों की ची ची प्यारी,
या बदल गई पवन की शीतलता सारी,
बदल गई क्या बचपन की कोमलता क्या री?
बदल गई क्या मानवता की जीविका सारी,
बदल गई किताबो की पंक्तियाँ सारी,
रूठ गई क्या हमसे ये ज़िंदगी प्यारी?

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Comments

8 responses to “बदलता ज़माना”

  1. Panna Avatar
    Panna

    बेहद खूबसूरत अहसास & अल्फ़ाज!

    1. urvashi jha Avatar
      urvashi jha

      @panna you may read more on kreatiwitty.com

  2. Ankit Bhadouria Avatar
    Ankit Bhadouria

    simply…..khubsurat!!

    1. urvashi jha Avatar
      urvashi jha

      thanks ankit,you may read more on kreatiwitty.com and help me give more feedback

      1. Ankit Bhadouria Avatar
        Ankit Bhadouria

        sure!! 🙂

  3. Mohit Sharma Avatar
    Mohit Sharma

    बच गई तो बस कुछ एहसास न्यारी,….wah..sahi kaha aapne!

  4. Satish Pandey

    बदल गई क्या मानवता की जीविका सारी,
    बदल गई किताबो की पंक्तियाँ सारी,
    रूठ गई क्या हमसे ये ज़िंदगी प्यारी?
    वाह वाह

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