बस एक बार फिर …

जॅंहा बचपन गुजारा ,
उन गलि‍यों में जाना चाहती हूं ;
जि‍न्होनें बचपन सॅंवारा,
उन पत्थरों से खेलना चाहती हूं ;
आलीशान बगांले को छोड़कर,
मम्मी की साड़ी से बने घर में रहना चाहती हॅू ;
ब्रांडेड चाकॅलेट छोड़कर,
सतंरी टॉफी और खट्टे – मीठे चुरन का मज़ा लेना चाहती हॅू ;
कि‍ताबों को छोड़कर गेंद थमाना चा‍हती हॅू ,
एक शरारत करना चाहती हॅू ,
वक्त के पहि‍ये को उल्टा घुमना चाहती हॅू ;
बस एक बार फि‍र बचपन जीना चाहती हॅू ,
बचपन जीना चाहती हॅू |

Comments

6 responses to “बस एक बार फिर …”

  1. Ankit Bhadouria Avatar
    Ankit Bhadouria

    V. true……

  2. UE Vijay Sharma Avatar
    UE Vijay Sharma

    Loved the expression of innocence …. beautiful Priya

  3. Panna Avatar

    nicely expressed poetry

  4. Lokesh Nashine Avatar
    Lokesh Nashine

    Nice

  5. Ajay Nawal Avatar
    Ajay Nawal

    बचपन की यादों को ताजा कर दिया आपने

  6. Abhishek kumar

    व वाह

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