चलते-चलते बहुत दूर निकल आई हूँ मैं,
बहुत कुछ पीछे छोड़ आयी हूँ मैं,
वो खुशियाँ, वो सपने,
वो मस्ती के पल अपने…
कुछ आँसू, कुछ यादें,
कुछ लोगों से की बातें…..
बस… छोड़ आयी हूँ मैं,
बहुत दूर निकल आयी हूँ मैं।
बहुत दूर…..
चलते-चलते कभी याद आते हैं वो पल,
जिन्हें जिया था मैंने कल।
तो सोचती हूँ कि क्यों???
खो गई वो हँसी कहीं,
खो गई वो मस्ती कहीं।
काश! मिल जाये फिर से मुझे वो पल कहीं…
पर… फिर याद आता है मुझे,
कि सब कुछ छोड़ आयी हूँ मैं,
बहुत दूर निकल आयी हूँ मैं।
बहुत दूर…..
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