बाबा मेरी पहचान है

नही था कोई एहसास उसके होने का घर मे
क्यों क्योंकि वो एक बेटी थी
नही थी कोई एहमियत उसकी
ओर न थी उसके मुंह मे ज़ुबाम
छीन ली थी जन्म से पहले ही उसकी आवाज़
क्या नही था हक़ उसको मां बाबा बोलने का
या नही है उसका कोई वजूद इस जहां से
बेटी है तो क्या वो भी तो इंसान है
उसकी भी तो एक पहचान है
उसको भी तो मिलनी चाहिए पहचान है
बनना उसको भी तो अपने बाबा की जान है
पर कोई होता नही पूरा उसका अरमान है
फिर भी वो कहती है बाबा मेरी पहचान है

Comments

2 responses to “बाबा मेरी पहचान है”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत खूब

  2. मार्मिक अभिव्यक्ति

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