बाबुल

बाबुल —————- ‌‌ याद आए बाबुल जब-जब तेरी,
आंख भर आए तब तब मेरी।
मैं चिड़िया थी अंगना तेरे,
चहका करती सांझ सवेरे।
गोद में हंसती रोती गाती,
थपकी तेरी मुझे सुलाती।
थी बाबुल तेरी शहजादी
याद तेरी आ आके रूलाती।
याद आए बाबुल जब-जब तेरी,
आंख भर आए तब तब मेरी।

2. आती है जब याद तिहारी
भर जाती आंखों की प्याली।
आंखों में तस्वीर घूमती,
बाहों में तेरी मैं झूलती
मन को मेरे बहुत सताती।
याद तेरी आ आके रूलाती।

बाबुल तेरी याद सताती।

3.प्यार दुलार से पाला तुमने,
बाबुल तेरी याद सताती।
अंधेरों में तेरी शक्ति
हर पल रक्षक बन कर आती।

कैसे कांधे लटक -लटक कर चीनी का बोरा बन जाती।
आंख मेरी आंसू भर लाती।याद तेरी जब आके सताती।

स्वरचित/मौलिक
रचना #निमिषा सिंघल

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