बिछडने के ख्याल से हम आपसे मिलने से डरते है

बिछडने के ख्याल से हम आपसे मिलने से डरते है

मगर कैसे बताएं हम किस कदर तनहा मरते है

 

देख न ले वो हमें, कहीं पुकार न ले

उनकी गलियों से यूं गुज़रने से डरते है

 

ताउम्र उन्हे चाहने के सिवा क्या किया है हमने

अब मगर यूं बेहिसाब चाहने से डरते है

 

कभी बारिश का इंतजार रहता था हमें सालभर

मगर अब भीग जाने के ख्याल से ही डरते है

 

दर्द को लिखना चाहते है मगर लफ़्ज साथ ही नही देते

दिल ए दरिया से बाहर आने से आजकल वो मुखरते है

Comments

6 responses to “बिछडने के ख्याल से हम आपसे मिलने से डरते है”

  1. Sumit Nanda Avatar
    Sumit Nanda

    उम्दा

  2. anupriya Avatar
    anupriya

    nice poetry

  3. Ajay Nawal Avatar
    Ajay Nawal

    nice

  4. Satish Pandey

    देख न ले वो हमें, कहीं पुकार न ले

    उनकी गलियों से यूं गुज़रने से डरते है
    वाह वाह जी

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