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  1. बहुत ही सुन्दर और सरल रचना ।कवि सतीश जी ने बदलते मौसम का ज़िक्र भी किया है । ऋतु बदलने से कभी कभी फल सब्जियों पर असर आ ही जाता है ,लेकिन ऋतु बदलने से इंसानी हृदय में परिवर्तन नहीं आता है ।हार, जीत तो ज़िन्दगी का हिस्सा है इनसे मनुज को नहीं घबराना चाहिए बल्कि हार से प्रेरणा और जीत का जश्न मनाते हुए ज़िन्दगी में खुश रहना चाहिए । यही इस कविता का सार है, जो बेहद ही शानदार है ।

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