बेकार में निराश न हुआ कीजिये (बरवै छंद)

जो चलता है हरदम, सत्य पथ पर,
उसे किसकी परवाह, क्यों हो डर।
दूजे की उन्नति पर, प्रसन्न जो,
वही दिशा देता है, जमाने को।
बेकार में निराश न हुआ कीजिये,
तुम दुआ दीजिये बस, दुआ लीजिए।
दाल-रोटी तक खूब, काम कीजिए,
बाकी आप प्रेम का, जाम पीजिए।
अतिशय चमक पर नहीं, कशिश कीजिए,
बेकार की आप मत, खलिश कीजिए।
आज हार है तो कल, जय मिलेगी,
तेरे गीतों को भी, लय मिलेगी।
——- डॉ0 सतीश चन्द्र पाण्डेय
काव्य सौंदर्य- (खड़ी बोली हिन्दी में बरवै छंद का समावेश करने का प्रयास किया है। विषम मात्रिक 12-7, 12-7 का प्रयोग का प्रयास है)

Comments

5 responses to “बेकार में निराश न हुआ कीजिये (बरवै छंद)”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर रचना

  2. Geeta kumari

    वाह वाह ,कवि सतीश जी की सत्य की और अग्रसर करने वाली,
    दूसरे की उन्नति पर प्रसन्न होने वाली और हमेशा खुश रहने का संदेश देने वाली बहुत ही सुन्दर छंद युक्त कविता

  3. बहुत ही उम्दा रचना

  4. अति सुन्दर

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