बेटियां

आसमां में हैं जितने सितारे पङे
उतने ही हैं तुझसे मेरे सपने जुड़े
अपने जीवन को देना एक पहचान तू
पूरे करना चुन चुन के अरमान तू।
बेटियों से है माता की शक्ति बढ़ी
अकेलेपन में साथ हमेशा रहतीं खङी
देखके जब बेटियों को, गुमान होने लगें
समझो उस जमाने को पर लगने लगे।
बेटियां पङाई है अब डर ये भगा
अपनी इस सोच को कर खुदसे जुदा
दूर रहकर भी फर्ज करतीं हैं पूरा
माँ बाप से तार रहता है हरदम जुङा।

जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं!
सुमन आर्या

Comments

3 responses to “बेटियां”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    वाह

  2. बेटियों पर बहुत ही उत्तम विचार कवि ने प्रस्तुत किए हैं

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