बे-वक़्त

जी में रड़क रही है साँसे की बस मर जाऊँ मैं
बे-वक़्त के बीमार दिल ले के किधर जाऊँ मैं

Comments

One response to “बे-वक़्त”

  1. Dev Kumar Avatar
    Dev Kumar

    Asm BHai

Leave a Reply

New Report

Close