बैंगनी चूड़ियां
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तुमने पहली मुलाकात में
जो भेंट की थी बैंगनी चूड़ियां
उनकी खनक आज भी
कानों में गूंजती है
जब टूटा था हमारा
प्यार भरा रिश्ता
एक गलतफहमी से
तो चूंड़ियों का टूटा हुआ टुकड़ा
उठाकर मैं बहुत रोई थी
वो बैंगनी चूड़ियां मेरे हाथों की
शोभा बढ़ाती थीं
जब खनकती थीं तो
तेरी याद दिलाती थी
आज कितने अर्से के बाद
वो बैंगनी चूड़ियां मैंने अपनी
कलाई पर सजाई हैं
उनकी खनक से आज मेरी आँख भर आई है..
**बैंगनी चूड़ियां**
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3 responses to “**बैंगनी चूड़ियां**”
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Tq
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सुंदर
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