9 Comments

  1. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है प्रज्ञा जी, किसी को भी किसी के शारीरिक दोष के बारे में कोई कटाक्ष या मज़ाक करने का कोई अधिकार नहीं है
    प्रकृति प्रदत्त दोष में कोई करे तो क्या करे, मेरा मानना है कि हमें किसी के व्यवहार से ही उसे आंकना चाहिए ना कि शारीरिक सुंदरता या शारीरिक दोष से ।शरीर तो वैसे भी नश्वर ही है । अमर तो आत्मा है तो आत्मा यानि रूह की सुंदरता देखी जनी चाहिए

    1. बिल्कुल सही कहा दी..
      ऐसे विचारों की आज कमी है लोग बस दूसरों का मजाक बनाने में लगे रहते हैं
      समीक्षा हेतु धन्यवाद

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