सर्वदा होश की अवस्था हैं ब्रह्मचर्य
विषयों से अनासक्त का नाम हैं ब्रह्मचर्य
पूर्व संस्कार का पूर्ण रुपेण त्याग हैं ब्रह्मचर्य
ब्रह्मचर्य कुछ भी नहीं :_
निज मूल स्थिति का नाम हैं ब्रह्मचर्य ।।१।।
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ज़िंदगी का आधार निजानुभुति हैं ब्रह्मचर्य
मन का एक्राग व्यस्तता हैं ब्रह्मचर्य
देह से अलगाव हैं ब्रह्मचर्य
आम धारणा से परे हैं ब्रह्मचर्य ।।२।।
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आत्मा कि उपज द्वन्दों में सम स्थिति हैं ब्रह्मचर्य
वर्तमान कि अवस्था भूत का त्याग हैं ब्रह्मचर्य
मरनासन्न व्यक्ति का आत्मबल हैं ब्रह्मचर्य
सृष्टि का आधार योगियों का प्राण हैं ब्रह्मचर्य ।।३।।
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गृहस्थों का लाज,युवाओं का शान हैं ब्रह्मचर्य
कुल मिलाकर पतितों का कल्याण मार्ग है ब्रह्मचर्य
✍️विकास कुमार (बिहार)
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