‘ब्लैकबोर्ड’ जैसा तुम्हारा दिल,
काले पत्थर सा सख्त ,
पर अन्दर से साफ है ।।
‘चॉक’ से तुम्हारे सुन्दर विचार,
इजहार करो,
अन्दर रखना पाप है ।।
कुछ गलत मानो हो भी जाए,
तो डरने की क्या बात है ।।
एक तो तेरे अपने है तेरे साथ,
दुजा ‘डस्टर’ तेरे हाथ है ।।
जहमत ही तो है उठानी,
है वही सख्ती, है वही कालापन,
पर ‘ब्लैकबोर्ड’ एक पल मे साफ है ।।
~ सचिन सनसनवाल
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