बड़ा अकड़ रहे थे वो चन्द बर्फ के टुकड़े बैठकर,
जो मेरे सनम के हाथ लगते ही पानी पानी हो गये।।
– राही (अंजाना)
बड़ा अकड़ रहे थे वो चन्द बर्फ के टुकड़े बैठकर

Comments
4 responses to “बड़ा अकड़ रहे थे वो चन्द बर्फ के टुकड़े बैठकर”
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Waah
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Thanks
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Very nice
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Thank you sir
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