दूजे से चिढ़ना छोडो
जो बढ़ता है बढ़ जाने दो जी,
आप चलो अपनी राहों में
औरों को भी चलने दो जी,
अपनी मेहनत से तुम पाओ
औरों को भी पाने दो जी ,
टांग फंसाना उचित नहीं है
सबको जीवन जीने दो जी,
आप चढ़ो ऊँची चोटी में
जितना भी चढ़ सकते हो,
दूजे को गड्ढे में डालो
यह सब अब रहने दो जी।
—— Dr. Satish Pandey
बढ़ता है बढ़ जाने दो
Comments
5 responses to “बढ़ता है बढ़ जाने दो”
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बहुत सुंदर
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Dhanyvaad ji
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अतिसुंदर
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Dhanyvad ji
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छोड़ो
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