भूखे तक अन्न पहुंचाना होगा
गरीब, असहाय, अनाथों को
खोज खोज कर अपनाना होगा,
भेदभाव की बातों को दफनाना होगा,
मनुष्य हैं हम मनुष्यता को
अपनाना होगा।
यदि अंधेरे का भीषण जंगल हो,
न कोई रोशनी का साधन हो,
तब वहीं पर उठा के सूखी घास
पत्थरों को रगड़ना होगा।
निरीह की मदद को मन
मचलना होगा।
कर्मपथ निकलना होगा।
गिर गिर के संभलना होगा।
झूठ से रोज उलझना होगा,
भूख तक अन्न पहुंचाना होगा,
कमजोर को अपनाना होगा।
भूख तक अन्न पहुंचाना होगा
Comments
4 responses to “भूख तक अन्न पहुंचाना होगा”
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निरीह की मदद को मन
मचलना होगा।
कर्मपथ निकलना होगा।
गिर गिर के संभलना होगा।
झूठ से रोज उलझना होगा,
भूख तक अन्न पहुंचाना होगा,……… कमजोर, गरीब और असहायों की मदद करने की प्रेरणा देती हुई कवि सतीश जी की बहुत श्रेष्ठ रचना, उम्दा लेखन -
अतिसुंदर भाव
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अति उत्तम लेखन
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भूखे तक अन्न पहुंचाना होगा
गरीब, असहाय, अनाथों को
खोज खोज कर अपनाना होगा,
भेदभाव की बातों को दफनाना होगा,बहुत खूब
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