भूल नहीं सकते
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भूल नहीं सकते वो रातें,
वो मनहूस घड़ी थी
या मेरी किस्मत फूटी,
एक नादानी से जंग छिड़ी,
जब से बिछड़े ना कभी मिले,
कॉपी में ढूंढ रहा हूं नंबर उसका,
खबर मैं ले लूं –
जब जब याद सताए चेहरा उसका
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**✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’——
भूल नहीं सकते
Comments
3 responses to “भूल नहीं सकते”
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बहुत सुंदर👌👌👌
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किसी दोस्त या उसकी कोई सहेली से ले लो नंबर ।
लेकिन कविता लिखी है बहुत सुंदर👌👌 -
अतिसुंदर
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