भोजपुरी गजल- जब बसर होला |

भोजपुरी गजल- जब बसर होला |
केहु के नेह मे देह के ना खबर होला |
प्रेम के रोग ह ई बड़ा जहर होला |
केतनों समझावे केहु कबों ना मानेला |
बहक जाला कदम अइसन ई डहर होला |
प्यार तोहसे ना करी ई का कहलू तू |
चाहे करा रुसवा तनको ना असर होला |
दिहला काहे दिल तू बोला ये बिधाता |
निकसे ना केहु दिल जब उ ठहर जाला |
मिले प्यार मे धोखा ई का जरूरी बा |
खा के ठोकर भी ना केहु सुधहर जाला |
बनल दुशमन जमाना राह मोहब्बत मे |
प्यार भइला के रूप ना उमर होला |
प्यार ना करी त का करी दुनिया मे |
बहे आँख से आँसू दिल केहु बसर होला |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

Comments

10 responses to “भोजपुरी गजल- जब बसर होला |”

  1. Praduman Amit

    वाह जी। राउर के ग़ज़ल में महत्वपूर्ण भाव बा।

    1. Shyam Kunvar Bharti

      parduman ji raaur dil se haardik aabhaar baa badai kare ke khaatir

    1. Shyam Kunvar Bharti

      pandit ji haardik aabhaar aapkaa

    1. Shyam Kunvar Bharti

      dhanywaad

  2. Satish Pandey

    प्यार भइला के रूप ना उमर होला |
    प्यार ना करी त का करी दुनिया मे |
    बहे आँख से आँसू दिल केहु बसर होला |
    वाह वाह बहुत लाजवाब भोजपुरी गजल, waah

    1. Shyam Kunvar Bharti

      haardik aabhaar baa apke

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