*भोर वाले मित्र*

अगर आपको है फिक्र,
अपने आर्थिक और दैहिक उत्थान की,
तो फ़िर बात सुनो एक काम की
आप अपने भोर वाले मित्र बनाएं,
जो आपके संग ,
नियमित रूप से सैर को जाएं
प्रभु का करते हुए नमन,
रात्रि वाले मित्र कृपया करें कम
कम शब्दों में ही,
अर्थ को समझ जाएं
तो आओ भोर वाले मित्र बनाएं।
_____✍️गीता

Comments

4 responses to “*भोर वाले मित्र*”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी🙏

  2. Satish Pandey

    कवि गीता जी ने अभिधागत लक्षणा के माध्यम से हास्य का पुट देकर प्रेरणात्मक शैली में इस कविता की रचना की है। कवि के विषय और व्यंग्य शैली दोनों में ताजगी हैं। बहुत सुंदर काव्य रचना।

    1. Geeta kumari

      कविता की इतनी सुंदर और सटीक समीक्षा करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

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