भव्य मंदिर बना, राम लला का
ना ही कोई उपमा है, ना कोई तोड़ इसकी कला का
सोचा था, चाहा था, उम्मीद थी लगाई,
आशा हुई है पूरी, देखो शुभ घड़ी है आई।
सदियों से प्रतीक्षा थी इस पल की,
टूटी हैं कड़ियां किसी के छ्ल की।
पुष्प बरसाएंगे देव नभ से,
प्रतीक्षा हो पूरी, चाहत थी कब से।
मंदिर पर चमकेगा सूरज भी चम – चम,
मेघों का जल भी बरसेगा छम – छम ।
जय – जय कार गूंज रही अयोध्या में,
नाच रही हैं ,अयोध्या में सखियां छम – छम।
हाथ जोड़कर करें वन्दना रामजी की
रामजी के बिन अयोध्या थी.फीकी ।।
🙏जय श्री राम🙏
मंदिर बना राम लला का
Comments
18 responses to “मंदिर बना राम लला का”
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जय श्री राम
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बहुत खूब
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धन्यवाद वसुंधरा जी 🙏
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जय श्री राम
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जय श्री राम 🙏
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जय हो
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जय श्री रामजी जी🙏
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बहुत खूब
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धा
सादर धन्यवाद भाई जी।
जय श्री राम
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वाह बहुत सुंदर रचना है। जय श्री राम 🙏
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बहुत बहुत शुक्रिया 🙏
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बहुत सुंदर गीता जी। जय हो रामजी की🙏
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सादर धन्यवाद आपका। जय श्री राम 🙏
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Jay shriram
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Jai shree Ram 🙏
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जय राम, श्रीराम
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जय श्री राम 🙏
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