सच का हो जायेगा भान
अब तुम मत बहना पवमान।
जहाँ-तहाँ खुशबू बिखराई
पाया फिर अपमान।
थोड़ा लाभ हुआ व्यापारी
आया है अभिमान।
कहाँ फँसाये, कहाँ रुलाये
नहीं भरोसा मान।
थाली खाली, पेट अधूरा
बिलख रहे हैं प्राण।
अब तुम मत बहना पवमान
सच का हो जायेगा भान।
मत बहना पवमान
Comments
2 responses to “मत बहना पवमान”
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बहुत सुन्दर पंक्तियाँ
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सादर अभिवादन
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