मधुशाला

मधुशाला में ताला न लगाइए
अभी नशा चढ़ा ही नहीं।
कुछ यादें और ताजा होने दीजिए
अभी तक पैमाने को लब से लगाया ही नहीं।।

Comments

4 responses to “मधुशाला”

  1. राकेश पाठक

    Nice

  2. बहुत रूमानी कविता 

  3. Amita

    बहुत सुंदर

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