जो कृत्य खुशी दे मन को
वह कृत्य तुझे करना होगा
नफरत विद्वेष भरी बातों से
दूर तुझे रहना होगा।
तन अलग कहे मन अलग कहे
उलझन का मूल यहीं पर है,
तन-मन दोनों की सुन तूने फिर
तालमेल करना होगा।
मन राजी हो तन राजी हो
उसमें ही खुशियाँ आती हैं,
जीने की चाहत बढ़ जाये
ऐसा तूने करना होगा।
तन गलत दिशा में बढ़े अगर
रोके मन उसको शिद्दत से,
तन की जिद को कर शांत तुझे
मन को भी सुनना होगा।
मन से मत कभी बगावत कर
मन में है अद्भुत शक्ति बसी
तेरी राहें रोशन करने
उस ताकत को जगना होगा।
मन को भी सुनना होगा
Comments
3 responses to “मन को भी सुनना होगा”
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मन से मत कभी बगावत कर
मन में है अद्भुत शक्ति बसी
तेरी राहें रोशन करने
उस ताकत को जगना होगा।
_______ “मन के हारे हार है मन के जीते जीत”, मन की शक्ति ही सर्वोत्तम शक्ति है उसी को ही आधार बनाकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ने को प्रेरित करती हुई कवि सतीश जी की बहुत सुंदर एवम् श्रेष्ठ रचना, उम्दा लेखन -

अति सुन्दर रचना
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वाह, बहुत सुंदर
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