मन तुम्हारा गीत सा

मन तुम्हारा गीत सा ,
पावन सुरीला !
तन मधुर मकरंद से,
आवेष्टित !
भाव का भ्रम जाल है,
चारो तरफ!
कामनाओं से भरी,
मनुहार हो तुम!
स्वप्न का संसार हो तुम !!

आर्य हरीश कोशलपुरी

Comments

3 responses to “मन तुम्हारा गीत सा”

  1. Ajay Nawal Avatar
    Ajay Nawal

    Bahut ache bro

  2. Satish Pandey

    कामनाओं से भरी,
    मनुहार हो तुम!
    स्वप्न का संसार हो तुम !!
    बहुत खूब

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