महफूज

चल घटा जो हुआ इश्क़ में, शायद अच्छा ही हुआ।
कम से कम नादान दिल, तीर ए नजर से तो बचा।।

Comments

3 responses to “महफूज”

  1. वाह वाह बहुत खूब

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