महफ़िल में रौनक भर दें

मुझ में भी कमियां होंगी
तुझ में भी कमियां होंगी,
तुझ में, मुझ में दोनों में
लाखों ही कमियां होंगी।
आ कमियां खूबी में बदलें
मिलकर कर कदम बढ़ा लें
हम दोनों अपनी खूबी से
महफ़िल में रौनक भर दें।

Comments

6 responses to “महफ़िल में रौनक भर दें”

  1. Geeta kumari

    बहुत ही सुन्दर काव्य रचना है सतीश जी ।बहुत ख़ूब , बेहतरीन लेखन सुंदर प्रस्तुति

  2. बहुत खूब सर वाह

  3. बहुत ही सुन्दर कविता, वाह क्या बात है

  4. अति सुन्दर

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