मुझ में भी कमियां होंगी
तुझ में भी कमियां होंगी,
तुझ में, मुझ में दोनों में
लाखों ही कमियां होंगी।
आ कमियां खूबी में बदलें
मिलकर कर कदम बढ़ा लें
हम दोनों अपनी खूबी से
महफ़िल में रौनक भर दें।
महफ़िल में रौनक भर दें
Comments
6 responses to “महफ़िल में रौनक भर दें”
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👌✍✍
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बहुत ही सुन्दर काव्य रचना है सतीश जी ।बहुत ख़ूब , बेहतरीन लेखन सुंदर प्रस्तुति
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बहुत खूब सर वाह
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अतिसुंदर भाव
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बहुत ही सुन्दर कविता, वाह क्या बात है
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अति सुन्दर
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