कविता- मां पछताई होगी
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मां बहुत पछताई होगी,
बेटी को जन्म देकर रोई होगी,
पढ़ी अखबार में-
दो वर्षीय बच्ची के रेप की घटना जब,
मां बच्ची को सीने से लगाकर रोई होगी,
लाखों मन्नत कुलदेवता को याद किया,
रहे सुरक्षित बेटी के लिए दुआ किया,
आंखों में भर भर के आंसू रोती है,
रोते-रोते बेटी को लेकर सो जाती है,
पछताती है जब,
बेटी के लिए मन्नत मांगा था,
मां रोते-रोते अंधी होती,
जब एक दरिंदा बेटी पर एसिड फेंका था,
मां सोच रही है,
मै मर जाती बचपन में तो अच्छा था,
मेरे कोख बेटी ना आती तो अच्छा था,
मेरी इज्जत बच जाती आज सवेरे,
घात लगाए यदि खेत में ना बैठा होता,
दीया संस्कार भारी था,
फूलों में उसे पाला था,
सुंदर इतनी जैसे ताजमहल की मूरत हो,
मूरत को बदसूरत कर दिया,
जब उसे सोशल मीडिया पर बदनाम किया,
सब लोग हंसे,
दुनिया भर की सवाल करें,
मां रोते-रोते पागल हो गई,
जब उसके बेटी को-
लोगों ने बदचलन कहा,
सून भारत के लोग सभी
ऋषि भी तुमसे पूछ रहा,
जग गलती बेटी में देखें
बेटे को क्या सजा दिया,
शासन को सौंप जरा
करके नपुंसक छोड़ जरा,
बेटी से हमदर्द है तुमको,
बेटे को घर से बाहर करके दिखा
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✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-
माँ पिता होगी

Comments
2 responses to “माँ पिता होगी”
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Great
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यथार्थ चित्रण
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