माखन की चोरी

मनमोहक छवि मनमोहन की
और मनहर है हर लीला उनकी।
आनन्दकन्द आनन्द सबन हित
घर-घर चोरी की माखन की।।

Comments

3 responses to “माखन की चोरी”

  1. Geeta kumari

    वाह, बहुत सुंदर

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही गज़ब शास्त्री जी

  3. Praduman Amit

    अति सुन्दर भाव प्रकट है।

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