माखन चोर माखन चोर।
ब्रज में मचा है यही शोर ।।
सब से नजरे बचा के देखो।
कैसे भागे माखन चोर।।
कहीं मटकी फूटी ,
कहीं माखन बिखरे ।
पकड़ो पकड़ो दौड़ो दौड़ो,
व्रज में आया कैसा चोर।।
कान पकड़ के मैया बोली,
कहाँ गया था, रात से हो गई भोर।।
माखन चोर
Comments
10 responses to “माखन चोर”
-

This comment is currently unavailable
-

समीक्षा के लिए धन्यवाद।
-
-

बहुत khoob
-

धन्यवाद महोदय।
-
-
सुंदर चित्रण
-

आपकी समीक्षा ही मेरी शान है।
-
-
उत्तम
-

धन्यवाद।
-
-
बहुत खूब
-

शुक्रिया। समीक्षा के लिए।
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.