माना के ज़हरीली ज़िन्दगी है

माना के ज़हरीली ज़िन्दगी है मगर जिगर पाक रखते हैं,

हम इन्सा नहीं जो दिल में कोई बात रखते हैं,

यूँ तो गले लगाने की फितरत नहीं हमारी,

मगर इरादे जो भी हो हम साफ़ साफ़ रखते हैं॥

राही (अंजाना)

Comments

9 responses to “माना के ज़हरीली ज़िन्दगी है”

  1. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर पंक्तियां

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