ज़िन्दगी मुझ से बस अपनी ही मनवाती है कभी मेरी सुनती नहीं बस अपनी ही सुनाती है… कभी जो पूछू सवाल उस से,माँगा करू जवाब उस से बस वो धीरे से मुस्कुराती है ज़िन्दगी मुझ […]

ज़िन्दगी कोरा कागज़ थी हमारी तुमने कुछ रंग भर दिए आये हो तोह रुक जाओ इतनी जल्दी क्या जाने की पर रोक तोह हम सकते नही वरना रब बुरा मान जाएगा उसे भी तोह अच्छे […]

परत दर परत यूँही खुलती सी नज़र आती है ज़िन्दगी, उधेड़ती तो किसी को सिलती नज़र आती है ज़िन्दगी, हालात बदलते ही नहीं ऐसा दौर भी आ जाता है कभी, के जिस्म को काट भूख […]

पहली बार जब रोया तोह भूख और प्यास थी दूसरी बार जब रोया स्कूल का पहला दिन था तिसरी बार जब रोया तब स्कूल का आखरी दिन था कॉलेज के दिन तोह रुलाने के थे […]

ज़िन्दगी एक रेस है जिसमे दौड़ना ही होगा, वक्त रहते वक्त का मुँह मोड़ना ही होगा, कालचक्र का काम है चलना, चलेगा दोस्तों, हमें अपने मन को एक बार फिर टटोलना ही होगा, ऋतुएँ परिवर्तित […]

कभी आइस– क्रीम की तरह पिघलती रही जिन्दगी, हवा की रूख की तरफ बदलती रही जिन्दगी, लाख समझया उसे पाने की जिद ना करो– पर इक वच्चे की तरह जिद ठानी रही जिन्दगी। मंजिल पर […]

कभी आइस– क्रीम की तरह पिघलती रही जिन्दगी, हवा की रूख की तरफ बदलती रही जिन्दगी, लाख समझया उसे पाने की जिद ना करो– पर इक वच्चे की तरह जिद ठानी रही जिन्दगी। मंजिल पर […]

अरे ,ओ जिन्दगी से निऱाश आदमी सुनो— सड़क पर भटकते हो क़्यो सुनो। कुछ तो कर्म करो—– अपने स्थिति को देखो कुछ तो शर्म करो।। कब –तक कोसते रहोगे,अपने भाग्य को, अंधकार से निकलने का […]

ज़िन्दगी जैसे शतरंज की बिसात हो गई, जिसने समझ ली उसकी जीत ना समझा जो उसकी मात हो गई, ज़िन्दगी जैसे…… बंट गए हैं चौंसठ खानों में हम कुछ इस तरह, जैसे खाने से हटते […]

माना के ज़हरीली ज़िन्दगी है मगर जिगर पाक रखते हैं, हम इन्सा नहीं जो दिल में कोई बात रखते हैं, यूँ तो गले लगाने की फितरत नहीं हमारी, मगर इरादे जो भी हो हम साफ़ […]

नयन अश्कों से भिगोता रहा हूं मैं जिन्दगी भर । गजल उनको ही सुनाता रहा हूं मैं जिन्दगी भर । दरख्ते उम्मीद अब है कहां लगतें तेरे जमी पर रकीबों सा अब तड़पता रहा हूं […]

अभी ज़िन्दगी की किताब के चन्द पन्नों को पटल कर देखा है। अपने बचपन को जैसे सरसरी निगाहों से गुजरते देखा है, यूँ तो खुशियों के पायदान के पृष्ठ पर आज पैर हैं हमारे, मगर […]

एक नज़र चाह कर भी मिलाने को तैयार नहीं, ज़िन्दगी एक पल भी सर उठाने को तैयार नहीं, नोच खाने को बैठी है एक ज़िन्दगी ज़िन्दगी को कैसे, क्यों एक लम्हा भी कोई ठहर जाने […]

  अभी ज़िन्दगी की किताब के चन्द पन्नों को पटल कर देखा है। अपने बचपन को जैसे सरसरी निगाहों से गुजरते देखा है, यूँ तो खुशियों के पायदान के पृष्ठ पर आज पैर हैं हमारे, […]

“**जिन्दगी के तजुर्बे”** ************ जिंदगी के तजुर्बे सताते बहुत हैं , हँसाते बहुत हैं , रुलाते बहुत हैं । कभी हों अकेले , हाँ बिल्कुल अकेले, तजुर्बे साथ मन से निभाते बहुत हैं । *********^^^^^^^^************ […]

Happy mother day मेरे तरफ से एक छोटी सी कोशिश उम्मीद करता हूँ सबको पसंद आएगा €€€€€€€€€€€€€ ऐसी बेबसी भरी जिन्दगी देने की वजहा बता देता, ऐसा क्या किये थे तू मुझे मेरी खता बता […]

इस तरह उलझी रही है जिन्दगी,,,,,, कोन कहता है सही है जिन्दगी।।।।। उलझनो का हाल मै किससे कहु,,, आँख के रस्ते बही है जिन्दगी।।।। अब नही पढना नशीब में इसे,,, गर्द सी मुझपे जमी है […]

बन्द कर अपने जज़्बातों के सभी दरवाजों को, लगाये लब्जों पर हम खांमोशी के बड़े तालों को।   देखो किस तरह ढूंढने में लगे हैं हम कचरे में छिपी अपनी जिंदगी की चाबियों को॥   […]

तलाशती ये ज़िंदगी कचरे के ढेर में रोटी. फेक देते हैं हम जो अनुपयोगी समझ के. कैसे करते गुजर बसर ये भी इंसान तो हैं जिंदगी ये पाकर मौत गले लगाये चल रहे. ज़हर भरे […]

सब कुछ तो छोड़ आया मैं अपना अतीत के पन्नों में सख्शियत मेरी अब इंसान -ऐ -आम रह गई है खुशियों की सुबह न जाने कब से नहीं देखी बस ज़िन्दगी में गमो की शाम […]

मौत ने तोहफा दिया ज़िन्दगी मिल जाए तो सवरती बिखरती कट जाती है रो रो कर गुजरती लम्हे सी हस्ती दिल खोल बोलती सोच कर ये मौत ही देती है ज़िन्दगी देती तोहफे हज़ार इक […]

ढूंढ रहे है जिंदगी जीने की वजह कोई। तुम्हारी यादें न हो है ऐसी जगह कोई।। , हक़ीक़त बयान करना अगर जुर्म है गर। फिर बोल दो हमारे लिए भी सजा कोई।। , दर ब […]

जिन्दगी  भर  भटका  किये  राह-ए-उम्मीद  में, कभी   पहुँच   ही  ना  पाये  दयार-ए-हबीब में, शाम  ढ़ल  गयी  और  हम  यूँ  ही  बैठे रह गये, वो आये और जा बस गये निगह-ए-अंदलीब में, क्या   […]

तेरा डूबना मुश्किल था “राही” मगर, क्या करते जब दूर तक साहिल नहीं था, कहाँ कब किससे गुफ्तगू करते “राही”, जब दूर तलक कोई सफर में मुसाफिर नहीं था, सबसे ज्यादा उसके करीब था “राही” […]

तुम्हें ज़िन्दगी के उजाले मुबारक अंधेरे हमें आज रास आ गए हैं तुम्हें पा के हम ख़ुद से दूर हो गए थे तुम्हें छोड़कर अपने पास आ गए हैं तुम्हें ज़िन्दगी के… तुम्हारी वफ़ा से […]

हर एक कश के साथ धुंए में अपनी ज़िन्दगी उड़ाते हैं, देखो आजकल के मनचले कैसे अपने कदम भटकाते हैं, पाते हैं कितने ही संस्कार अपने घरों से मगर, हर सिगरट के साथ वो रोज […]

मैं उनसे चन्द पल की ही तो मोहलत माँगता था, ना जानें क्यों उन्होंनें जिन्दगी ही नाम कर दी हैं, मैं सोया हूँ नहीं दिन रात जबसे देखा हैं उनको, निगाह-ए-इल्तिफातों में सुबह से शाम […]

जिन्दगी का फलसफा कौन समझ पाता है हालात बदलते है नहीं वक्त गुजर जाता है कल ये हुआ,कल क्या होगा इस कशमकश में, पल पल पिस जाता है कल बदलता है नहीं आज बिगड़ जाता […]

एक ताज़ा ग़ज़ल के चन्द अश’आर आप हज़रात की ख़िदमत में पेश करता हूँ; गौर कीजिएगा… चाहता था जिसे जिन्दगी की तरह, वो रहा बेवफ़ा जिन्दगी की तरह। हाँ मेरा प्यार था बस उसी के […]

जब होश संभाला तो तुमसे जिंदगी को समझाया जाता था अब कुछ भी समझता हूँ तो तुम्हारा सृजन होता है जब मस्तिष्क का ताल दिल के तारों को छेड़ता है तो झंकृत हो तुम बाहर […]

बहुत अमीर है जिन्दगी, लफ़्जो को सलीके से, बिठाने में वक्त बिताया करती, गर्मी में सर्दी, सर्दी में गर्मी, यूँ  विपरीत परिस्थतियों को, मात देते हुए खेल आगे बढ़ाया करती, बहुत अमीर  है  जिन्दगी, न […]

**ज़िन्दगी ठहरी रही और उम्र आगे चल पड़ी::गज़ल** (मध्यम बहर पर) उस ख्वाब की ताबीर जब शम्म-ए-फुगन में जल पड़ी, तब ज़िन्दगी ठहरी रही और उम्र आगे चल पड़ी l फ़िर कैफियत का ज़िक्र भी […]

ज़िन्दगी खफा है अब मनाऊँ किस तरह दिल पे चोट है अब मुस्कुराऊँ किस तरह चोट कोई अंदर है जिससे टिस उठती है चिर से दिल दर्द अब दिखाऊँ किस तरह आँखों के तलवों निचे,काई […]

ज़िन्दगी में तजुर्बों की इक किताब रख चेहरे देख परख और उनका हिसाब रख !! मुझे बे-घर कर दिया नींद के फरिश्तों ने सूनी आँखों पे पहले तू कोई ख्वाब रख !! खुद ही खुद […]

जान भी तू है ज़िन्दगी तू है जाने जाँ जाने शायरी तू है खुश्बू-ए-इश्क से धुली तू है मेरी सांसो मॆं बस गई तू है रूबरू ख़्वाब मॆं हक़ीक़त मॆं मेरी रग रग मॆं दौड़ती […]