मिले हो आप
है यह नसीब हमारा,
तख्तों-ताज का
मालिक बना है,
दिल गरीब हमारा।
आया है आपके जब से
दिल करीब हमारा,
नहीं रहा है किसी मायने
दिल गरीब हमारा।
मिले हो आप
Comments
5 responses to “मिले हो आप”
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Great lines
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Thank u so much Chandra jee
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बहुत ख़ूब
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आपकी सुंदर समीक्षा के लिए धन्यवाद।
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लाजवाब प्रस्तुति
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