मिले हो आप

मिले हो आप
है यह नसीब हमारा,
तख्तों-ताज का
मालिक बना है,
दिल गरीब हमारा।
आया है आपके जब से
दिल करीब हमारा,
नहीं रहा है किसी मायने
दिल गरीब हमारा।

Comments

5 responses to “मिले हो आप”

    1. Praduman Amit

      Thank u so much Chandra jee

  1. बहुत ख़ूब

    1. Praduman Amit

      आपकी सुंदर समीक्षा के लिए धन्यवाद।

  2. लाजवाब प्रस्तुति

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