इस भरी रात में आये निंदिया
मीत तू रागिनी सुना दे ना
ये जो दिनभर की आपाधापी थी
तू मधुर बोल से भुला दे ना।
जिन्दगी में सुबह से रात हुई
रात से फिर सुबह का चक्र चला
बीतते जा रहे पलों में तू
रागिनी प्यार की सुना दे ना।
मीत तू रागिनी सुना दे ना
Comments
6 responses to “मीत तू रागिनी सुना दे ना”
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सुमधुर रचना
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बहुत ही सुन्दर
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बहुत खूब
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वाह लाजवाब अभिव्यक्ति
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जिंदगी की रेस में सुकून देती रचना
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बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
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