मुक्तक-मनहरण घनाक्षरी

अनुभव कंटक-जालों का बस उसी पथिक को होता है
जिसका चरण अग्निपथ चलकर कभी जला होता है |
मखमल और कंचन पर सोने वालों पता तुम्हें क्या है
जीवन सच में आतप अंधड़ में जीने वालों का होता है ||
उपाध्याय…

Comments

2 responses to “मुक्तक-मनहरण घनाक्षरी”

  1. Kalki Desai Avatar
    Kalki Desai

    behtareen

  2. राम नरेशपुरवाला

    Wah

Leave a Reply

New Report

Close