अनुभव कंटक-जालों का बस उसी पथिक को होता है
जिसका चरण अग्निपथ चलकर कभी जला होता है |
मखमल और कंचन पर सोने वालों पता तुम्हें क्या है
जीवन सच में आतप अंधड़ में जीने वालों का होता है ||
उपाध्याय…
मुक्तक-मनहरण घनाक्षरी
Comments
2 responses to “मुक्तक-मनहरण घनाक्षरी”
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behtareen
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Wah
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