मुक्तक

तेरा नाम लेकर तन्हाई मिल जाती है!
तेरा दर्द बनकर रुसवाई मिल जाती है!
शामों-सहर भटकता हूँ मैं तेरे लिए मगर,
मेरी जिन्द़गी को जुदाई मिल जाती है!

#महादेव_की_कविताऐं'(25)

Comments

3 responses to “मुक्तक”

  1. Dev Kumar Avatar
    Dev Kumar

    Bahut kHoob

  2. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

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