मुक्तक

चाँद से गुफ़्तगू में सितारे गिनते रह गए

हम तो मोम थे रात भर जलते रह गए

बस यही एक भूल हमसे सरेआम हुई

भूलना था तुम्हे हम की याद करते रहे गए

#VIP~

Comments

8 responses to “मुक्तक”

  1. सीमा राठी Avatar
    सीमा राठी

    Nice

  2. Abhishek kumar

    Good

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