मुक्तक

यूँ ही रोशनी नही होती,

मोम को जलना पड़ता है

यूँ ही चाहत नही मिलती

इश्क़ की हद से गुज़रना पड़ता है

“विपुल कुमार मिश्र”

 

Comments

2 responses to “मुक्तक”

  1. Abhishek kumar

    Good

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